Posts

Showing posts from May, 2022

टैक्स बचाने के लिए करें बचत योजनाओं में निवेश

देश में इंक्रीमेंट का साइकल शुरू हो गया है। कंपनियां योग्य टैलेंट को बरकरार रखने के लिए मोटी हाइक देने की तैयारी में हैं। सैलरी में इजाफा होने के साथ टैक्स देनदारी भी बढ़ जाती है। ऐसे में टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश करना बेहद जरूरी है। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अभी तक टैक्स प्लानिंग नहीं की है तो अभी से इसकी शुरुआत कर दें। इनकम टैक्स के स्लैब में इस बार कोई बदलाव नहीं हुआ है, ऐसे में अगर टैक्स बचाना चाहते हैं तो इन योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। टैक्सपेयर  इनकम टैक्स एक्ट सेक्शन 80सी के तहत विभिन्न तरह के 1.50 लाख रुपए तक के निवेश पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। पीपीएफ, ईपीएफ, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस), होम लोन, सुकन्या समृद्धि योजना, टर्म इंश्योरेंस, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट, यूलिप आदि में निवेश करने पर इसका लाभ ले सकते हैं। सेक्शन 80सी बचत योजनाओं में करें निवेश सेक्शन 80डी होम  लोन लेने वाले टैक्सपेयर सेक्शन 80सी के तहत 1.50 लाख रुपए तक टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। लेकिन शर्त है कि घर 50 लाख रुपए से कम होनी चाहिए। वहीं सेक्शन 24 के तहत होम लोन के ब्याज पर ...

पीपीएफ है फायदे का सौदा

  छोटी बचत के लिए पीपीएफ एक अच्छा विकल्प है।  इसमें आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स में छूट मिलती है।  साथ ही जितना पैसा कंट्रीब्यूट किया, उस पर टैक्स नहीं लगता। जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज भी टैक्स फी है।  मैच्योरिटी पर प्राप्त कुल राशि पर भी टैक्स नहीं लगता, यानी तीन बार टैक्स छूट का फायदा मिलता है।  पीपीएफ में आप एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपए जमा करवा सकते हैं।  अभी पीपीएफ पर 7.1 फीसदी ब्याज देय है, जो अन्य सरकारी योजनाओं से जयादा है। बैंक या डाकघर में खुलवा सकते हैं।

लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीजः ऋण अवधि में भी मिलता रहेगा फायदा

  लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीजः ऋण अवधि में भी मिलता रहेगा फायदा सिक्योरिटीज के बदले मिलता है सस्ता लोन शॉर्ट और लॉन्ग टर्म लोन के लिए लोन अगेंस्ट शेयर फायदेमंद विकल्प है। इमरजेंसी में निवेश को बेचने या भुनाने के बजाय सिक्योरिटीज के बदले लोन लेना बेहतर विकल्प है। इन्वेस्टमेंट एक्सपटूर्स का कहना है कि लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज की प्रक्रिया धीमी जरूर है, लेकिन इसके जरिए सस्ती व्याज दरों पर लोन ले सकते हैं। धन जुटाने के लिए किसी भी सिक्योरिटीज को गिरवी रखा जा सकता है। जैसे शेयर, इक्विटी या डेट म्यूचुअल  फंड, बीमा पॉलिसीज और बॉन्ड। कितना लोन ले सकेंगे किन सिक्योरिटीज के बदले लोन मिलेगा, यह लेंडर्स पर निर्भर करता है। इक्विटी के मामले में प्रतिभूतियों के मूल्य के 50 से 60 फीसदी के बराबर लोन ले सकते हैं। डेट फंड और बॉन्ड के मामले में लोन अमाउंट अधिक हो सकता है। हालांकि, - लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज (एलएएस) में प्रोसेसिंग चार्ज, स्टांप ड्यूटी,प्लेज क्रिएशन फीस  चुकाना पड़ सकता है। बढ़ता रहेगा निवेश   सिक्योरिटीज गिरवी रखे जाने के बावजूद समय के साथ इसमें ग्रोथ होता रहता है। निवेश पर ...