लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीजः ऋण अवधि में भी मिलता रहेगा फायदा

 लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीजः ऋण अवधि में भी मिलता रहेगा फायदा

सिक्योरिटीज के बदले मिलता है सस्ता लोन

शॉर्ट और लॉन्ग टर्म लोन के लिए लोन अगेंस्ट शेयर फायदेमंद विकल्प है।

  1. इमरजेंसी में निवेश को बेचने या भुनाने के बजाय सिक्योरिटीज के बदले लोन लेना बेहतर विकल्प है।
  2. इन्वेस्टमेंट एक्सपटूर्स का कहना है कि लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज की प्रक्रिया धीमी जरूर है,
  3. लेकिन इसके जरिए सस्ती व्याज दरों पर लोन ले सकते हैं।
  4. धन जुटाने के लिए किसी भी सिक्योरिटीज को गिरवी रखा जा सकता है। जैसे शेयर, इक्विटी या डेट म्यूचुअल  फंड, बीमा पॉलिसीज और बॉन्ड।

कितना लोन ले सकेंगे

  1. किन सिक्योरिटीज के बदले लोन मिलेगा, यह लेंडर्स पर निर्भर करता है।
  2. इक्विटी के मामले में प्रतिभूतियों के मूल्य के 50 से 60 फीसदी के बराबर लोन ले सकते हैं। डेट फंड और बॉन्ड के मामले में लोन अमाउंट अधिक हो सकता है।
  3. हालांकि, - लोन अगेंस्ट सिक्योरिटीज (एलएएस) में प्रोसेसिंग चार्ज, स्टांप ड्यूटी,प्लेज क्रिएशन फीस  चुकाना पड़ सकता है।

बढ़ता रहेगा निवेश 

  1. सिक्योरिटीज गिरवी रखे जाने के बावजूद समय के साथ इसमें ग्रोथ होता रहता है। निवेश पर लोन अवधि के दौरान इंटरेस्ट, बोनस और डिविडेंड आदि मिलता रहता है।
  2. लोन लेने वाले भुगतान करने में विफल रहते हैं तो लेंडर सिक्योरिटीज़ का निपटान कर ऋण की वसूली कर सकता है।

छोटी अवधि का ऋण 

  1. लोन अगेंस्ट शेयर छोटी अवधि के ऋण हैं। इसमें आमतौर पर रिपेमेंट की अवधि 36 महीने तक होती है। कुछ बैंकों में फ्लेक्सिबल रिपेमेंट का विकल्प भी मिलता है।
  2. इस विकल्प के तहत लोन का ब्याज हर महीने और मूलधन लोन अवधि के अंत में चुकाने का विकल्प मिलता है।

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